Truth-is-stranger-than-fiction

Saturday, April 14, 2012

डर

मेरी नज़रों की शरारत  से  बहक न जाओ तुम,
तुमसे नज़रें मिलाने से डरती हूँ मैं

मेरे ख्यालों की गर्मी से पिघल न जाओ तुम,
तुम्हे सोचने से डरती  हूँ मैं

मेरे हाथों की नरमी से पसीज न जाओ तुम,
तुम्हे  छूने की चाहत से डरती  हूँ मैं

मेरी खुशुबू से मदहोश न हो जाओ तुम,
तुम्हारे बहुत करीब आने से डरती  हूँ मैं 

मेरी धडकनों की तेज़ी से घबरा न जाओ तुम 
तुम से दिल लगाने से डरती  हूँ मैं 

किसी एक पल कभी अगर नहीं डरी मैं इनसे ,
उस एक पल की कल्पना से डरती  हूँ मैं





1 Comments:

At 14 April, 2012, Blogger Himanshu Tandon said...

Good one...

 

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