डर
मेरी नज़रों की शरारत से बहक न जाओ तुम,
तुमसे नज़रें मिलाने से डरती हूँ मैं मेरे ख्यालों की गर्मी से पिघल न जाओ तुम,
तुम्हे सोचने से डरती हूँ मैं
मेरे हाथों की नरमी से पसीज न जाओ तुम,
तुम्हे छूने की चाहत से डरती हूँ मैं
मेरी खुशुबू से मदहोश न हो जाओ तुम,
तुम्हारे बहुत करीब आने से डरती हूँ मैं
मेरी धडकनों की तेज़ी से घबरा न जाओ तुम
तुम से दिल लगाने से डरती हूँ मैं
किसी एक पल कभी अगर नहीं डरी मैं इनसे ,
उस एक पल की कल्पना से डरती हूँ मैं

1 Comments:
Good one...
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